रिश्तेदारी
पुलिस ट्रेफिकमेन ट्रैक्टर ड्राइवर पर खीजते हुऍ बोला॰॰॰॰साले तुमसे कितनी बार कहा है कि ट्राली मे सवारियां मत बिठाया करो।
आज तुम्हारा चालान बनाना ही पड़ेगा यूँ सीधी उंगली से घी नही निकलेगा।
नही साहब, ये सवारियाँ नहीं सब रिश्तेदार हैं।
अच्छा अच्छा आज छोड़ रहा हूँ । आइंदा इतने सारे रिश्तेदार एक साथ मत बिठाना समझे।ड्राइवर ने आगे जाकर ट्रेक्टर रोक दिया और बोला .....लाओ काका दस रुपये।
बुआ,मामा,मौसी सभी फटाफट दस दस रुपये निकालो, वो कम्बख्त फिर न आ जाए !
राहत
कल्लू आजकल हद से ज्यादा शराब पीने लगा है। उसकी हालत भी दिन-ब- दिन गिरती जा रही है।यह भी सुना है उसे कैंसर हो गया है। पैसे बर्बाद कर रहा है सो अलग । तुम बीवी होकर उसे समझाती क्यों नहीं ?
भैया, मैं तो समझा समझा कर थक चुकी हूं। कुछ कहती हूं तो मार मारकर अधमरा कर देते हैं। अच्छा ही है उनका शराब पीना, नशे में उन्हें आराम की नींद तो आ जाती है।
जलजला
साहब.....साहब.....
क्या है बे,हीरालाल बोल !
थानेदार साहब इत्मिनान से रोजनामचा उलट रहे थे।
साहब,साहब बहुत बुरी खबर है शहर में जहरीली शराब पीने से दस आदमी मर गए ! हीरालाल के पसीने छूट रहे थे और घबराहट के कारण वह थर थर काँप रहा था।
अरे इसमें घबराने की क्या बात है, हीरालाल ! कोई पहाड़ तो नहीं टूटा,कोई जलजला तो नहीं आ गया ये तो होता ही रहता है तेरे या मेरे घर का तो नहीं मरा.....न ?
दस में ....आपका अनूप भी......
क्या.....?
सुनते ही साहब मूर्छित होकर गिर पड़े।
मौत
पापा,पापा तुम तो कहते थे मौत एक दिन सबको आती है।
पिछले साल दीपू के डैडी मर गये। कल मोंटी के पापा की
एक्सीडेंट में मौत हो गई !
हाँ बेटा, मौत एक न एक दिन सबको आती है।
अच्छा पापा ये मौत कब मरेगी.......?
भूख
माँ.....माँ रोटी दो ना...बडी जोर की भूख लगी है
छह साल की गुड्डी दुबले पतले शरीर से चड्डी लटकाए
माँ से लिपटकर भूख से बिलखती हुई बार बार रोटी मांग रही थी। माँ ने उसे झटककर दूर कर दिया और चीखकर बोली....
परसों सुबह ही तो खाई थी तूने रोटी....अब कहां से ला दूं..? मुझे खाले भट्टी.....तुझे शर्म नहीं आती....है। भगवान..... मां सिर पीट पीटकर रोने लगीँ।
गुड्डी चिल्ला रही थी....
कल से रोटी नहीं खाई.......माँ..आज भी रोटी नहीं मिली ना...तो जैसे अन्नू भैया भूख से मर गए ना वैसे ही देखना एक दिन मैं भी भूख से तड़फ. के मर जाऊँगी !
हैसियत
क्यों बे रामू तेरा बाप कहां है? सालभर हो गया हरामी को.....न कर्ज पटाया न ब्याज भेजा .....मैं कल ही तीरथ से लौटा तो मुनीम जी ने बताया के तेरे बाप ने छदाम् तक नहीं दी.....कहाँ है बुला तो सही उसको...तीरथ से लौटकर उसका मुँह देखना पड़ रहा है.....छिः छिः राम राम कैसे पापी लोग पड़े हैं जगत में
बुला उसे...फिर नहा धोकर पूजा करुँगा ....।
रामू सेठ के पांव पकड़ कर रोने लगा। मेरे बापू को डेढ़ महीने हुए स्वर्गवासी हो गए.......मुझ पर रहम करो सेठ साहब !
तो तेरा बाप स्वर्गवासी हो गया...हाँ ? मेरा कर्ज पटाए बगैर स्वर्ग मिल गया उसे ? तुम हरिजन....नीच लोग......अपनी औकात समझा करो। अरे स्वर्ग तो हम लोगों की जगह है रे छोकरे....दुनियाँ भर के तीरथ करके स्वर्ग मिलता है....पैसे डुबा कर स्वर्ग नहीं मिलता।
तेरा बाप गया परलोक जाने दे....मैं तो तेरे को जानता हूँ..अब एक महीने की मोहलत दे रहा हूँ......पूरी सिलक जमा करवा दे.....नहीं तो नरक क्या होता है यहीं बतला दूंगा, समझे !"